भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी (CERT-In) ने वित्तीय कंपनियों के लिए चेतावनी जारी की है। भारत की वित्तीय कंपनियां एक खतरनाक AI आधारित साइबर हमले के निशाने पर हैं। एजेंसी ने इस हैकिंग ग्रुप की पहचान की है और खुलासा किया है कि ये हैकर्स AI तकनीक और आधुनिक टूल्स का इस्तेमाल करके वित्तीय संस्थानों के डेटा और सिस्टम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें से कम से कम दो टूल्स का संबंध चीन से है। अब भारत भी उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है, जहां बैंकों के खिलाफ ऐसे टूल्स का इस्तेमाल किया गया है।
क्राफ्टी फाल्कन ने इन कंपनियों में लगाई सेंध
बुधवार को जारी एक एडवाइजरी के अनुसार, इस हैंकिंग ग्रुप को इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने क्राफ्टी फाल्कन (Crafty Falcon) नाम दिया है। ग्रुप ने नॉन-बैंक लेंडर्स, फिनटेक कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों की सुरक्षा में सेंध लगाई है। CERT-In ने यह नहीं बताया कि इन हमलों के पीछे कौन है या यह संगठन कहां से काम करता है।
यह चेतावनी भारतीय बैंकों और वित्तीय कंपनियों पर हाल ही में हुए साइबर हमलों के बाद जारी की गई है। इन हमलों को देखते हुए सरकारी अधिकारियों ने पहले ही सतर्क रहने को कहा था, जिसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी सभी वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा की जांच और नियमों को और कड़ा कर दिया है।
दो टूल्स का संबंध चीन से
इसमें चार टूल्स के नाम बताए गए हैं। ARTEX, PentAGI, Cairn और CyberStrikeAI। सुरक्षा रिसर्च करने वालों का दावा है कि इनमें से कम से कम दो का संबंध चीन से है।
साइबर सुरक्षा फर्म क्राउडस्ट्राइक (CrowdStrike) के अनुसार, चीन में बने ARTEX का इस्तेमाल सितंबर के आखिर से दक्षिण कोरियाई बैंकों पर हुए हमलों में किया गया है।
फर्म ने बताया कि चीन से जुड़े एक ग्रुप ने इस टूल का इस्तेमाल जासूसी करने के लिए किया, जिसका निशाना कम से कम 14 देशों के 200 से ज्यादा संगठन थे।
एजेंसी ने यह नहीं कहा कि ये हमले किसी देश द्वारा कराए गए प्रायोजित थे। ये टूल्स ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, दक्षिण कोरियाई हमलों से नाम जुड़ने के बाद, पिछले महीने इसके डेवलपर ने ARTEX को प्राइवेट कर दिया।
AI और मशीन लर्निंग की ली मदद
CERT-In के अनुसार, क्राफ्टी फाल्कन (Crafty Falcon) नाम का यह हैकिंग ग्रुप AI और मशीन लर्निंग की मदद से कंपनियों पर नजर रखता है। इसके बाद, यह पीड़ितों के खुद के पेमेंट और बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाकर चालाकी से पैसे उड़ा लेता है।
हमले छुट्टियों, वीकेंड और ऐसे समय में किए गए, जब लोगों की नजर कम होती है। ताकि इनका पता देर से चले। एजेंसी ने बताया कि जिन कंपनियों ने पहले मिली चेतावनियों के बाद कमियों को ठीक किया था, उन पर फिर से हमला किया गया, क्योंकि उन्होंने कमियों को पूरी तरह से दूर नहीं किया था।
SBI पर हुआ था हमला
देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने पिछले महीने जानकारी दी कि डार्क वेब पर उसके 3,897 ग्राहकों का डेटा लीक हो गया है। नॉन-बैंक लेंडर स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल (Spandana Sphoorty Financial) ने 1 नवंबर को अपने बैंक अकाउंट से बिना परमिशन के पैसे निकाले जाने की रिपोर्ट दी और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने बताया कि वह ग्राहकों के डेटा लीक होने की संभावना की जांच कर रहा है। CERT-In ने यह नहीं बताया कि कौन सी घटनाएं क्राफ्टी फाल्कन से जुड़ी थीं। CERT-In ने बताया कि हमलावर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI टूल्स का इस्तेमाल करके मशीन की गति से सुरक्षा में सेंध लगाते हैं। एजेंसी ने इस खतरे को सक्रिय और जारी बताया है।