कटनी जिले के सलैया फाटक बेस मेटल ब्लॉक को मध्यप्रदेश शासन की 21वें चरण की ई-नीलामी में शामिल किया गया है। 150 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फैले इस ब्लॉक में तांबा, चांदी और सोने के भंडार होने की संभावना है। खनिज संसाधन विभाग ने इसे कंपोजिट लाइसेंस के लिए रखा है।

नीलामी में सफल बोलीदाता को तय नियम और शर्तों के तहत पहले खनिजों की खोज और संसाधनों का वैज्ञानिक आकलन करने का अधिकार मिलेगा। अन्वेषण में खनिज भंडार की पुष्टि और उसकी मात्रा का आकलन होने के बाद खनन गतिविधियों का रास्ता खुलेगा।

इस चरण में मध्यप्रदेश के 8 जिलों के 12 खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी शुरू की गई है। कटनी के अलावा दमोह, नीमच, बालाघाट, पांढुर्णा, बैतूल, सतना और रीवा के ब्लॉक भी शामिल हैं। इनमें चूना पत्थर, तांबा, मैंगनीज, डोलोमाइट, जस्ता और अन्य बेस मेटल की संभावनाएं हैं। इन ब्लॉकों को खनन पट्टे और कंपोजिट लाइसेंस के लिए रखा गया है।

कटनी-जबलपुर सीमा पर भी खनिज मिलने की संभावना

कटनी जिले में खनिज संपदा को लेकर पहले भी संभावनाएं सामने आई हैं। कुछ महीने पहले कटनी और जबलपुर जिले की सीमा पर टाइटेनियम, वेनेडियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और स्लोमैन्स लेटराइट जैसे खनिज मिलने की प्रबल संभावना जताई गई थी। इसके लिए एक माइनिंग ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।

इस ब्लॉक का कुल क्षेत्रफल लगभग 405 हेक्टेयर बताया गया है। इसमें कटनी जिले के अमोच, छपरा और दिवरी गांवों का करीब 150 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है, जबकि शेष हिस्सा जबलपुर जिले की सीमा में आता है।

खनिज आधारित उद्योगों और रोजगार की उम्मीद

यदि निवेशक इन ब्लॉकों में रुचि दिखाते हैं और आगे की प्रक्रियाएं अनुकूल रहती हैं, तो कटनी में खनिज आधारित उद्योगों के विकास की संभावनाएं बन सकती हैं। अन्वेषण और खनन गतिविधियां शुरू होने पर तकनीकी विशेषज्ञों, मशीनरी, परिवहन, निर्माण और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सेवाओं की मांग बढ़ सकती है।

इससे स्थानीय कारोबारियों, सेवा प्रदाताओं और युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बन सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ खनिज भंडार की पुष्टि, निवेश और परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद ही सामने आएगा।