भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और ऊर्जा संरक्षण के आह्वान के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय कार्यप्रणाली में मितव्ययता (फ्रूगैलिटी) बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
अब विभागीय सचिवों को प्रदेश के बाहर शासकीय यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही अधिकारियों-कर्मचारियों की अनावश्यक यात्राओं पर भी नियंत्रण रखा जाएगा।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि बैठकों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सेमिनारों का आयोजन यथासंभव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया जाए, ताकि समय और संसाधनों दोनों की बचत हो सके।
मुख्यमंत्री पहले ही दे चुके हैं उदाहरण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं अपने सरकारी काफिले को 13 वाहनों से घटाकर 7 वाहन कर दिया है और उसमें इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया है। इसके साथ ही सरकारी कार्यक्रमों में वाहनों के सीमित उपयोग के निर्देश भी पहले से लागू हैं।
सार्वजनिक परिवहन और कार-पूलिंग को बढ़ावा
निर्देशों के अनुसार अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, कार-पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। केंद्र सरकार से जुड़े मामलों के लिए नई दिल्ली और मुंबई स्थित आवासीय आयुक्त कार्यालयों की मदद लेने पर भी जोर दिया गया है।
ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस
सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, पाइप्ड नेचुरल गैस नेटवर्क के विस्तार और उज्ज्वला योजना के डुप्लीकेट व अपात्र कनेक्शनों की पहचान के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
निर्माण विभागों को पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री के उपयोग और उसके प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सोलर पैनल और जन-जागरूकता अभियान
सभी विभागों को प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत घरों की छतों पर सौर ऊर्जा पैनल लगाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं जनसंपर्क विभाग "मेरा भारत-मेरा योगदान" जैसे जन-जागरूकता अभियान चलाकर ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश देगा।
खनिज साधन विभाग को लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ, कॉपर और कोयला जैसे रणनीतिक खनिजों की स्वीकृतियों और लीज प्रक्रिया को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।