कोच ने अंपायरिंग करने की सलाह दी
चोट के बाद एक समय ऐसा भी आया जब सोनाली और उनके परिवार को लगा कि हॉकी खिलाड़ी के रूप में उनका सफर यहीं समाप्त हो जाएगा। हालांकि उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया। मां कंचन सिंह और कोच शशि नवैत ने लगातार उनका मनोबल बढ़ाया। मां ने उन्हें समझाया कि जीवन में केवल खिलाड़ी बनना ही लक्ष्य नहीं होता, बल्कि खेल से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी पहचान बनाई जा सकती है। इसी दौरान कोच शशि नवैत ने उन्हें अंपायरिंग में करियर बनाने की सलाह दी।महिला जूनियर एशिया कप में अंपायरिंग की
सोनाली ने कोच के सुझाव को गंभीरता से लिया और हॉकी से जुड़े रहने के लिए अंपायर बनने का फैसला किया। उन्होंने अंपायरिंग की शुरुआती ट्रेनिंग अपने कोच से ली और बाद में भारतीय हॉकी फेडरेशन के अंपायर पैनल से जुड़े रघु प्रसाद आरवी से भी ट्रेनिंग ली। कड़ी मेहनत और समर्पण के दम पर सोनाली ने हॉकी अंपायर के रूप में एफआईएच की पात्रता हासिल की। इसके बाद उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग की। उनकी प्रतिभा और निष्पक्ष निर्णय क्षमता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ ने उन्हें अपने अंपायर पैनल में शामिल कर लिया।हाल ही में 4 से 13 सितंबर 2026 तक चीन के मोकी शहर में आयोजितमहिला जूनियर हॉकी एशिया कप में सोनाली सिंह को अंपायरों के पैनल में शामिल किया गया। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने कई मुकाबलों में सटीक और निष्पक्ष अंपायरिंग कर अपनी क्षमता का परिचय दिया। भारत ने इस टूर्नामेंट का खिताब जीता था।

