
मेले में 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के हजारों बच्चों का भाषा, संख्या ज्ञान, संज्ञानात्मक क्षमता, शारीरिक विकास और सामाजिक-भावनात्मक कौशल के आधार पर दोबारा आकलन किया गया। 26 मई को आयोजित पहले स्कूल रेडीनेस मेले की तुलना में बच्चों की प्रगति दर्ज कर रिपोर्ट कार्ड अभिभावकों को सौंपे गए।
एक माह तक घर-घर चली सीखने की गतिविधियां
अधिकारियों के अनुसार पिछले एक माह तक चले माता सहभागिता अभियान के दौरान माताओं को प्रतिदिन व्हाट्सएप के माध्यम से "एक खेल, एक कहानी और एक कविता" आधारित वीडियो भेजे गए। इन गतिविधियों को घर पर कराने के कारण बच्चों में सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
रंग और अंक पहचानने में भी हुआ सुधार
मध्य भोपाल की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि जिन बच्चों को एक माह पहले रंग और अंक पहचानने में कठिनाई होती थी, वे अब आत्मविश्वास के साथ सभी गतिविधियां पूरी कर रहे हैं। इस बदलाव में माताओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण रही।
अधिकारियों ने किया केंद्रों का निरीक्षण
मेले के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में माताओं, सामुदायिक स्वयंसेवकों और स्थानीय विद्यालयों के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
एक जिला कार्यक्रम अधिकारी ने कहा कि अब माताएं केवल जानकारी लेने वाली नहीं रहीं, बल्कि अपने बच्चों की पहली शिक्षिका के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
जिला रिपोर्ट तैयार करेगा प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित कर समर कैम्प-2026 की विस्तृत जिला रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के स्टेट हेड सज्जन सिंह शेखावत ने कहा कि वास्तविक सफलता मेले में नहीं, बल्कि पिछले एक माह में परिवारों द्वारा घर पर अपनाई गई सीखने की नई आदतों में दिखाई देती है।
अब कक्षा-1 में सहज प्रवेश पर रहेगा फोकस
स्कूल रेडीनेस मेला-2 के समापन के बाद विभाग अब नए शैक्षणिक सत्र में कक्षा-1 में प्रवेश लेने वाले बच्चों के सहज संक्रमण पर काम करेगा। इस अभियान के अनुभवों के आधार पर इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की संभावना है।