नमस्कार,

दिल्ली से राहुल गांधी जी ने चीफ साहब को फोन कर कहा-डोटासरा जी, FIR दर्ज कराओ। करौली में कांग्रेस विधायक के 2 टिकट चोरी हो गए। पाली में भाजपा की पूर्व विधायक को पार्टी ने टिकट नहीं दिया, दर्द ये कि बेटे को भी नहीं दिया। उदयपुर में मनचले सावधान, गरबा पंडालों से उचित दूरी बनाए रखें।

राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…

1. चीफ को आया 'सुपर चीफ' का फोन


एक बार राहुल गांधी जी ने डोटासरा जी से कह दिया था कि राजस्थान में तुम और जूली जी अच्छा काम कर रहे हो।

इसके बाद से डोटासरा जी छप्पर-फाड़ मनोबल लिए घूम रहे हैं। मजाल जो कोई कार्यकर्ता पार्टी या राहुल-खड़गे जी के अलावा किसी का नारा लगा दे।

डोटासरा जी एकदम कसे-कसे चल रहे हैं। मुद्दे उठाकर पार्टी को सड़क पर खींचकर ला रहे हैं। दिग्गजों को भिगो रहे हैं।

राहुल जी के खास विश्वासपात्र बन गए हैं। कोई भी काम होता है तो राहुल जी सीधे चीफ साहब को फोन कर देते हैं। हुकुम की तामील तुरंत होती है।

दिल्ली में लेडी पुलिस की एक जवान प्रदर्शन के दौरान NSUI की सचिव के साथ बस में खूब गुत्थमगुत्था हुई। वीडियो सामने आए।

राहुल जी ने पिटने वाले तमाम छात्रनेताओं को एकजुट किया और सबकी आपबीती सुनी।

NSUI की सचिव रितु बराला राजस्थान के चिड़ावा से हैं। राहुल जी ने उनकी बात भी सुनी और डोटासरा जी को फोन कर आदेश दिया- डोटासरा जी, राजस्थान में दिल्ली की फलां लेडी पुलिस के खिलाफ FIR दर्ज कराओ।

डोटासरा जी को टास्क मिल गया है। उम्मीद है गमछा घुमाने वाली स्पीड से FIR दर्ज होगी।


2. विधायक साहिबा के 2 टिकट चोरी

उनका नाम अनिता जाटव है। वे करौली के हिंडौन सिटी से कांग्रेस की विधायक हैं। उनका स्टिंग ऑपरेशन हो गया था। उनके खिलाफ पोस्टर भी लग गए थे। तब वे सुर्खियों में आ गई थीं।

अब वे दोबारा सुर्खियों में हैं। उन्होंने अपने ही जिलाध्यक्ष यानी कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर पर टिकट चोरी करने और बेच देने के आरोप लगाए हैं।

पत्रकारों ने उन्हें हैरान-परेशान देखा तो घेर लिया। वे हिसाब-किताब समझाने लगीं। बोलीं- हिसाब से मुझे 7 सिंबल मिलने चाहिए थे। चार विधानसभा क्षेत्रों में मैं अकेली एससी कैंडिडेट हूं और ऊपर से महिला हूं। फिर भी जिलाध्यक्ष ने तानाशाही करते हुए मेरे दो सिंबल गायब कर दिए। मुझे 5 ही मिले।

पत्रकार ने सवाल किया- कौन से वार्ड के गायब हो गए? तत्परता से विधायक बोलीं- 31 और 33 के। पत्रकार ने फिर पूछा- टिकट गायब कर दिए का क्या मतलब? मैडम चाहती थीं कि पत्रकार बात को इशारों की भाषा में समझ जाए। बोलीं- मतलब समझ जाओ, आप समझदार हो।

पत्रकार ने निवेदन किया- आप ही बता दो जरा खुलकर। मैडम ने खुलकर बताना शुरू किया- जिलाध्यक्ष जी ने हमारे 2 टिकटों को बेच दिया।

जिलाध्यक्ष साहब ने हाल ही निकाय चुनाव के दौरान कहा था- कोई हम पर आरोप साबित कर दे कि हम कुछ गलत कर रहे हैं।

कुल मिलाकर अब विधायक मैडम को साबित भी करना होगा कि जिलाध्यक्ष जी ने ‘टिकट-चोरी’ की है।


3. पूर्व विधायक को 'टिकट वाला विकट दर्द'

टिकट का दर्द विकट होता है। असहनीय होता है। पाली के सोजत से दो बार MLA रह लेने के बाद भी पूर्व विधायक मैडम को जिला परिषद सदस्य का टिकट चाहिए था।

टिकट नहीं मिला। उन्होंने जिलाध्यक्ष से कहा- मुझे न सही तो मेरे बेटे को दे दो। जिलाध्यक्ष ने जवाब दिया- बेटा जीत नहीं पाएगा।

चार लोग कुछ कहते, इससे पहले परिवार के लोग ही कहने लगे- बताओ, दो बार की एमएलए और बेटे तक के लिए टिकट नहीं ला पाई। वो भी जिला परिषद का। क्या तुम्हारी इतनी भी नहीं चलती। छी।

फिर उन्होंने वही किया जो टिकट कटने के बाद नेतागण करते हैं। बोलीं- जिलाध्यक्ष कहते हैं कि बेटा जीत नहीं पाएगा, खुद तो पार्षद का चुनाव हार चुके है। निकाय चुनाव में टिकटों की बंदरबांट कर दी, जिनको दिया वो भी ज्यादातर हारे।

फिर उन्होंने निष्कर्ष में यह बात कही- मैं अपनी बात शीर्ष नेतृत्व से कहूंगी। हालांकि जिलाध्यक्ष महोदय ने भी खरा जवाब देते हुए कहा कि टिकट मैं अकेला तय नहीं करता। शीर्ष नेतृत्व से बात करो।

संभवत: पूर्व विधायक मैडम ने शीर्ष नेतृत्व से बात कर ली है। अब कह रही हैं कि पार्टी से जो भी खड़ा हो, सब लोग एकजुट होकर उसे जिताने का प्रयास करें।


4. चलते-चलते..

मनचले सावधान हो जाएं। कहीं ऐसा सोच रहे हों कि गरबा पंडाल में घुस जाएंगे और मनचाही हरकत कर खिसक लेंगे तो बता दें कि उदयपुर के मनचलों के साथ धोखा हो चुका है।

गरबा पंडाल में चनिया चोली पहनकर कोई आम लड़की डांस नहीं कर रही थी। पुलिस की लेडी जवान थी। ऐसी कई जवान गरबा के उत्सव में खो जाने की बजाय मनचलों पर नजर बनाए हुए थीं। नाचना तो बहना था। मकसद मनचलों को सबक सिखाना था।

इधर किसी ने आम लड़की समझ इशारेबाजी की उधर लेडी जवान ने मुखबिरी कर दी। पुलिस आई और पंडाल से ही खींचकर ले गई। ऐसे कई मनचले धरे गए।

भेष बदलकर ऐसे मजनुओं का मगज दुरुस्त करने का आइडिया एसपी मैडम का था। पंडाल में जाने से पहले महिला जवान बाकायदा चनिया चोली पहनकर तैयार हुईं। एसपी ने उन्हें बताया कि कैसे नजर रखनी है। क्या करना है कि खुद भी सुरक्षित रहें और दूसरे भी।

फिर सभी ने घेरा बनाकर आपस में मुटि्ठयां मिलाई और जोर से नारा लगाया- हम तैयार हैं।

तो भाईसाहब। आप जो भी हैं। जहां भी हैं। अगर पढ़ रहे हैं और करतूत करने का प्लान बना रहे हैं तो आगाह करना हमारा फर्ज है। छुटभैयागिरी के चक्कर में फजीहत ही नहीं बहुत कुछ हो सकता है।

पुलिस के लिए वैसे भी मशहूर है कि चोरी-चकारी करने वाले पर जरूर एक बार दया दिखा देती है, लड़कियों-बच्चियों पर बुरी नीयत रखने वालों के लिए खास इंतजाम होते हैं। सावधान।


इनपुट सहयोग- मुकेश हिंगड़ (उदयपुर), ओम टेलर (पाली)।