क्या किसी चीज को ठंडा रखने के लिए आग का भी इस्तेमाल किया जा सकता है? दरअसल ग्रीनहिल फोर्ज नाम के एक यूट्यूबर ने आग, पानी और नमक का इस्तेमाल करके ऐसा फ्रिज बनाया है, जो बिजली खाने वाले कंप्रेसर के बिना ठंडक दे सकता है। इसे लेकर ग्रीनहिल फोर्ज ने एक वीडियो भी पोस्ट किया है, जिसमें उनका प्रोटोटाइप तापमान को 5 डिग्री सेल्सियस तक लेकर जाने में कामियाब रहा। वे देश या इलाके जो बिजली संकट की समस्या को झेल रहे हैं, उनके लिए यह प्रयोग उम्मीद की किरण साबित हो सकता है।
आग और नमक से कैसे मिलेगी ठंडक?
ग्रीनहिल फोर्ज का प्रोटोटाइप एब्जॉर्प्शन रेफ्रिजरेशन टेक्नोलॉजी पर काम करता है। यह तकनीक एक सदी से भी ज्यादा पुरानी है। इसमें ठंडक के लिए कंप्रेसर की जरूरत नहीं पड़ती।
एब्जॉर्प्शन रेफ्रिजरेशन के सिस्टम के दो मुख्य हिस्से हैं। जनरेटर और एब्जॉर्बर। इसमें जनरेटर में कैल्शियम क्लोराइड यानी सड़क पर डलने वाले नमक का घोल और डिस्टिल्ड पानी भरा जाता है।
आग की गर्मी से जैसे ही यह घोल गर्म होता है, पानी भाप बनकर कंडेनसर में चला जाता है और वापस पानी में बदल जाता है।
नमक का घोल और भाप पैदा करते हैं ठंडक
इसके बाद यह पानी काफी कम दबाव वाले इवेपोरेटर में पहुंचता है। इसमें पानी अपने उबलने के तापमान से पहले ही भाप बनने लगता है। पानी के भाप बनने की प्रक्रिया में यह आसपास की गर्मी को खींच लेता है।
इससे ठंडक पैदा होती है। इसके बाद एब्जॉर्बर में गाढ़ा नमक का घोल छिड़का जाता है, जो भाप को सोखकर दबाव को लगातार कम बनाए रखता है। आसान शब्दों में समझें तो आग गर्मी देती है और नमक का घोल कम दबाव पर पानी को सुखाकर ठंड बनाए रखता है।
खुद हाथों से बनाया प्रोटोटाइप
रिपोर्ट्स के अनुसार, और यूट्यूबर ग्रीनहिल फोर्ज ने अपना प्रोटोटाइप खुद हाथों से तैयार किया है। इसके लिए उन्होंने स्टेनलेस स्टील की चादरों, पाइपों और सिल्वर ब्रेजिंग का इस्तेमाल किया है। उन्होनें कूलिंग कॉइल को मोड़ने के लिए पाइप में पानी जमाकर उसे मोड़ा ताकि वह पिचके नहीं। इसी तरह लीकेज रोकने के लिए वैक्यूम पंप की मदद ली गई।
ग्रीनहिल फोर्ज ने पूरे सिस्टम की निगरानी के लिए एक आर्डिनो कंट्रोलर भी लगाया, जो लगातार तापमान, दबाव और पंप की स्पीड को कंट्रोल करता है और खतरे पर अलार्म बजाकर सतर्क करता है।
ऐसे कूलिंग सिस्टम का फायदा क्या है?
एक सामान्य फ्रिज में ठंडक के लिए कंप्रेसर का इस्तेमाल होता है, जो कि भारी मात्रा में बिजली इस्तेमाल करता है। वहीं ग्रीनहिल फोर्ज के प्रोटोटाइप में ठंडक बिना कंप्रेसर के पैदा की जाती है। इसकी वजह से यह बिजली की भारी बचत कर सकता है।
हालांकि, यह सिस्टम पूरी तरह बिजली-मुक्त नहीं है। इसमें छोटे सर्कुलेशन पंप और कूलिंग फैन का इस्तेमाल होता है, जो कि लगभग 30 से 50 वॉट बिजली का इस्तेमाल करते हैं। इतनी बिजली आसानी से किसी छोटे सोलर पैनल से भी मिल सकती है। इस सिस्टम में ठंडक मुख्य तौर पर लकड़ी या चूल्हे की आग से बनती है।
यह तकनीक उन इलाकों, फार्महाउस या वर्कशॉप्स के लिए बेहतरीन ऑप्शन बन सकती हैं, जहां बिजली उपलब्ध नहीं लेकिन जलाने के लिए लकड़ी आसानी से मिल सकती है।