ये दर्द है ग्वालियर के विद्याराम राठौर का। 17 अक्टूबर की रात शीतला माता मंदिर में दर्शन करने गया उनका 21 वर्षीय बेटा पवन ‘नो एंट्री’ में घुसे बेकाबू ट्रक की चपेट में आ गया। हादसे में 16 लोगों की मौत हुई।
पवन की मौत से परिवार का सपना टूट गया। अब विद्याराम को गिरवी रखे मकान का कर्ज चुकाने की चिंता है। उनकी सरकार से गुहार है कि बड़े बेटे को नौकरी मिल जाए, ताकि परिवार संभल सके और कर्ज उतारने में मदद मिले।
‘मां मना करती रही, लेकिन वह जाने की जिद कर बैठा’
विद्याराम बताते हैं कि हादसे वाली रात पवन के कुछ दोस्त पैदल शीतला माता मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। पवन ने भी उनके साथ जाने की इच्छा जताई। उसकी मां ने उसे जाने से मना किया, लेकिन वह दोस्तों के साथ जाने की जिद करने लगा। आखिरकार माता-पिता ने उसे जाने दिया।
परिवार को अंदाजा नहीं था कि दोस्तों के साथ मंदिर जाने की यह जिद पवन की जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगी। जिस बेटे के लौटने का इंतजार था, उसके घर पहुंचने से पहले ही उसकी मौत की खबर आ गई।
‘दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर खेती करने को मजबूर’
पवन पढ़ाई में होशियार था। पिता विद्याराम उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे। वह ग्वालियर से बीएचएमएस की पढ़ाई कर रहा था। उसकी पढ़ाई जारी रखने और परिवार का खर्च चलाने के लिए विद्याराम ने मकान गिरवी रख दिया। वह दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर खेती करने लगे।
परिवार को उम्मीद थी कि पवन डॉक्टर बनकर आर्थिक परेशानियां दूर करेगा। उनका बड़ा बेटा विशाल भोपाल से बीटेक कर रहा है। माता-पिता चाहते थे कि दोनों बेटे अपने पैरों पर खड़े हो जाएं, ताकि उन्हें भी मेहनत भरी जिंदगी से राहत मिल सके।
बेटे को याद कर माता-पिता रो पड़ते हैं। विद्याराम कहते हैं- हमने सोचा था कि पवन पढ़कर बड़ा डॉक्टर बनेगा और हमारे बुढ़ापे की लाठी बनेगा, लेकिन भगवान ने हमारी वही लाठी छीन ली। अब हमारे जीने का कोई मकसद नहीं बचा।
‘नहाकर दर्शन करने की बात कह रहा था, तभी ट्रक ने कुचल दिया’
पवन के दोस्तों ने परिवार को बताया कि वह धार्मिक स्वभाव का था। सभी पैदल मंदिर पहुंचे तो पवन ने गेट के पास नहाने की बात कही। वह कह रहा था कि नहाकर ही मंदिर में दर्शन करने जाएगा।
इसी दौरान चीनौर की ओर से ढलान पर तेजी से एक बेकाबू ट्रक आया। टक्कर इतनी तेज थी कि पवन उछलकर पास की दुकान में जा गिरा। ट्रक उसके ऊपर चढ़ गया। मंदिर में दर्शन करने निकला पवन फिर कभी घर नहीं लौटा।
‘यह सिर्फ हादसा नहीं, पुलिस-प्रशासन की लापरवाही है’
पवन की मौत से परिवार में दुख के साथ आक्रोश भी है। परिजन का कहना है कि ‘नो एंट्री’ के दौरान भारी ट्रक का मंदिर के पास तक पहुंच जाना पुलिस और प्रशासन की गंभीर लापरवाही है।
उनका आरोप है कि अगर ट्रक को रास्ते में ही रोक लिया जाता, तो कई लोगों की जान बच सकती थी। परिवार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है।
बड़ा भाई विशाल बोला- ऐसे रास्ते से ट्रक कैसे गुजरा?
पवन के बड़े भाई विशाल राठौर हादसे वाली जगह पर उसका फोन और बाकी सामान ढूंढने गए थे। उन्होंने बताया कि वहां रास्ता बहुत संकरा है। पत्थर भी छोटे-छोटे हैं। ऐसे में इतना बड़ा ट्रक उस रास्ते से कैसे गुजर गया, यह उनकी समझ से परे है।
विशाल के मुताबिक, सीसीटीवी में यह भी सामने आया है कि हादसे से पहले एक और ट्रक वहां से गुजरा था। उन्होंने मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की। भाई को खोने का मुझे बहुत दुख है। मेरी मां बीमार रहती हैं। अब जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।
‘बड़े बेटे को नौकरी मिल जाए तो कर्ज चुका सकें’
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। मकान गिरवी रखकर लिया गया कर्ज भी चुकाना है। ऐसे में विद्याराम की सरकार से गुहार है कि उनके बड़े बेटे को नौकरी मिल जाए, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति संभल सके और कर्ज उतारने में मदद मिले।
₹200 में ट्रक को एंट्री देने का आरोप
बताया जा रहा है कि ग्वालियर में हादसे से पहले ट्रक को ₹200 लेकर प्रवेश दिया गया था। चेक पॉइंट पर कथित अवैध वसूली को लेकर सरकार और नगर निगम के अधिकारियों के बीच चर्चा होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, ₹200 लेकर ट्रक को प्रवेश देने के आरोप की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शीतला माता मंदिर के बाहर हुए हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर (एडीएम) सीबी प्रसाद को सौंपी है। उन्हें 7 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी होगी।
बुधवार से घटना से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच में पता लगाया जाएगा कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक कैसे पहुंचे, उन्हें प्रवेश किसने दिया और हादसे के समय सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी।
ने के लिए विद्याराम ने अपना घर गिरवी रखा, वह सपना अब अधूरा रह गया है। परिवार के सामने एक तरफ बेटे को खोने का गम है, तो दूसरी तरफ कर्ज चुकाने और आगे की जिंदगी संभालने की चिंता।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पहुंचे…
जानिए, क्या हुआ था ग्वालियर में…
17 अक्टूबर की रात ग्वालियर के सातऊ गांव की पहाड़ियों पर स्थित शीतला माता मंदिर में सप्तमी पर दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। रात करीब 1:30 बजे चीनौर की ओर से ढलान वाले रास्ते पर दो ट्रक आए।
एक चालक ने ट्रक रोक लिया, लेकिन दूसरा उसे संभाल नहीं सका। बेकाबू ट्रक ‘नो एंट्री’ के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया। लोगों को कुचलते हुए मंदिर के प्रवेश द्वार से टकरा गया। हादसे में 16 लोगों की मौत हुई, जबकि 41 घायल हो गए।
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के बाहर हुए भीषण सड़क हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर (एडीएम) सीबी प्रसाद को सौंपी है। उन्हें 7 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। बुधवार से घटना से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे।